Ganesh Chaturthi: बप्पा को घर लाने की कर लें तैयारी, जानें कब और कैसे करें मूर्ति स्थापना?

 
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गणपति चतुर्दशी की तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं. हर साल की तरह इस साल भी बप्पा के आगमन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. 10 दिन तक चलने वाले इस पर्व को बड़ी धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी पर लोग बप्पा के वस्त्र से लेकर भोग तक की सारी चीजें उनकी पसंद की लाते हैं, ताकि गणपति  को प्रसन्न कर सकें. गणपति स्थापना में बप्पा के भोग से लेकर श्रृंगार जैसी कई चीजें अहम होती हैं. ऐसे में गणपति स्थापना से पहले कुछ चीजों को ध्यान में रखना जरूरी होता है. अगर आप बप्पा की इन चीजों को ध्यान में रखकर तैयारियां करेंगे तो ही बप्पा खुशी-खुशी आपके घर विराजेंगे और आपके दुख-कष्ट हर लेंगे. आइए डालते हैं एक नजर इन खास तैयारियों पर...

गणेश चतुर्थी पर अगर आप गणपति लाने की सोच रहे हैं तो बता दें कि सफेद मदार की जड़ या फिर मिट्टी से बनी गणेश मूर्ति को पूजा के लिए शुभ माना जाता है. यही नहीं, आप सोना-चांदी, तांबे आदि से बनी गणेश मूर्ति की भी स्थापना कर सकते हैं. बस प्लास्टर ऑफ पेरिस या किसी अन्य मैटिरियल से बनी मूर्ति को पूजा में रखना अशुभ माना जाता है. इसलिए ऐसी मूर्ति लेने से परहेज करें.

ऐसा माना जाता है कि गणेश महाराज  की बैठी हुई प्रतिमा ज्यादा फलदायी होती है. ऐसे में गणपति की मूर्ति खरीदते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें. हो सकता है पूजा में गणपित की ऐसी मूर्ति रखना आपके लिए शुभ हो जाए और बप्पा आपकी पूजा से प्रसन्न होकर आपके बिगड़े कामों को बना दें. इतना ही नहीं, किसी कार्य में आ रही रुकावटों को भी पल में दूर कर सकते हैं.

वाममुखी गणपति की मूर्ति घर लाएंगे तो उन्हें प्रसन्न करना आसान होता है. दरअसल, गणेश जी की बाईं ओर वाली सूंड को वाममुखी गणपति कहा जाता है. कहते हैं वाममुखी गणपति की पूजा करना आसान होता है. जबकि दाईं ओर सूंड वाले गणपति की पूजा के लिए विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है.

ऐसी मान्यता है कि गणपति की सफेद या सिंदूरी रंग की प्रतिमा लेना शुभ माना जाता है. तो इस बार अगर बप्पा की मूर्ति घर में स्थापित करने का प्लान बना रहे हैं, तो कोशिश करें कि सफेद या सिंदूरी रंग की हो. वैसे तो आप किसी भी रंग की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं.

गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त

10 सितंबर 2021, शुक्रवार को आप दोपहर 12:17 बजे से लेकर रात 10 बजे तक गणपति मूर्ति स्थापना कर सकते हैं।

गणपति विसर्जन का समय

अन्नत चतुर्दशी यानि गणपति को विदाई 19 सितंबर 2021 से 20 सितंबर को मनाई जाएगी।

सुबह - 7:39 से दोपहर 12:14 तक
दोपहर - दोपहर 1:46 से 3:18 तक
शाम - शाम 6:21 से 10:46 तक
रात - रात 1:43 से 3:11 तक (20 सितंबर)
प्रातः काल मुहूर्त - सुबह 4:40 से 6:08 बजे तक (20 सितंबर)

कैसे मनाया जाता है गणेश चतुर्थी का पर्व?

गणेश चतुर्थी के दौरान घर पर बप्पा की मूर्ति स्थापना की जाती है और उसके फिर 10 दिनों तक उनकी पूजा अर्चना की जाती है। इसके बाद नदी में उनकी मूर्ति का विसर्जन किया जाता है। कुछ लोग 5 या 7 दिन के लिए भी घर में बप्पा की स्थापना करते हैं।

कहां लगाएं बप्पा का आसन?

सबसे पहले घर के मंदिर या देव स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई कर लें। फिर दूर्वा, गंगाजल और पान के पत्ते से बप्पा को स्नान करवाकर पीले वस्त्र पहनाएं और मोली बांधें।आसन पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर चावल, नारियल समेत कलश रखकर बप्पा की मूर्ति स्थापना करें। इसके बाद भगवान को रोली-तिलक, फल-फूल, प्रसाद चढ़ाए और आरती करके पूजा करें। 

रोज करें इस मंत्र का जाप

जब तक बप्पा आपके घर हो, सुबह शाम उनकी पूजा करने के साथ दिन में 3 बार भोग लगाएं। भगवान गणेश को मोदक का प्रसाद जरूर लगाएं। इसके आलावा इन मंत्रों का जाप करना ना भूलें

- "ऊं गं गणपतये नम: मंत्र"। 
- "ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात"
-  "ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश.
ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति. मेरे कर दूर क्लेश"

बप्पा को क्या-क्या चढ़ाएं?

पूजा करते समय भगवान गणेश को 5 दूर्वा, चंदन, मौली, चावल, केसर, हल्दी, लौंग चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा बप्पा को 21 लड्डूओं या पंचमेवा का भोग लगाकर गरीब लोगों में बांट दें। भगवान आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे।

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