Covid-19: कोरोना वैक्सीन की तीसरी डोज, जानिए किसके लिए है जरूरी और क्या कहती है स्टडी

 
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हाल ही में हुई एक स्टडी में ये पाया गया है कि, कुछ कैंसर पेशेंट में वैक्सीन का असर नहीं हुआ हैं । कोरोना वायरस से बचाव के लिए दी जाने वाली दो डोज की वैक्सीन से इम्यूनोकंप्रोमाइज्ड लोगों में उचित मात्रा में एंटीबॉडी डेवलप नहीं हो पाती है, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इंम्यूनोकंप्रोमाइज्ड लोग कैंसर, किजनी फेल्यर, ऑरगन ट्रांसप्लांट और लीवर की गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते हैं । कुछ देशों में चल रहे शोध कार्य से पता चला है कि, ऐसे मरीजों में तीसरी डोज दिए जाने से एंटीबॉडी की मात्रा में बढ़ोतरी होती है ।

इसके आगे शोधकर्ताओं ने जानकारी देते हुए बताया है कि, ऑरगन ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों में तीसरी डोज से करीब 68 प्रतिशत इम्युनिटी बढी है, जिनमें दो डोज के बाद 40 प्रतिशत इम्युनिटी पैदा होती थी और यहीं कारण है कि, फ्रांस में इसी वजह से कम इम्यून कंडीशन वालों को अप्रैल से तीसरी डोज दी जाने लगी है । दरअसल, इसकी एक वजह हेपेटाइटिस बी और इन्फलूएंजा की बीमारी में बूस्टर डोज दिया जाना है, जिसके कारण इम्यूनोकंप्रोमाइज्ड लोगों में इम्युनिटी को बढ़ा हुआ पाया गया है ।

दरअसल, दुनिया में पांच फीसदी लोग इम्यूनोकंप्रोमाइज्ड हैं जो कैंसर, ऑरगन ट्रांसप्लांट, किडनी फेल और क्रॉनिक लीवर बीमारी से पीड़ित हैं । इन बीमार लोगों को रीटूक्सान, स्टीरॉयड, मीथोट्रीक्सेट जैसी दवाइयों का इस्तेमाल होता है । इस नई स्टडी में ये भी पाया गया है कि, 30 ऑरगन ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों में तीसरी डोज के बाद एंटीबॉडी में बढ़ोतरी हुई हैं । ब्लड कैंसर से पीड़ित लोगों 15 फीसदी और इम्यून सप्रेसर ड्रग लेने वालों में करीब 30 प्रतिशत । इतना ही नहीं, करीब 658 लोगों पर की गई स्टडी में देखा गया कि आधे से कम लोगों में डिटेक्टेबल मात्रा में एंटीबॉडी मौजूद था ।

इसके बारे में, अमेरिका के डॉ बालास हॉलमॉस ने जानकारी देते हुए कहा है कि, पोस्ट ट्रांसप्लांट पेशेंट में बूस्टर डोज के प्रभाव पर व्यापक पैमाने पर अध्ययन किया जाना जरूरी है ।
मीडिया खबर के मुताबिक, कम इम्युनिटी वाले लोगों में वायरस ज्यादा समय तक रेप्लीकेट कर सकता है और इसकी वजह से नए वेरिएंट का जन्म हो सकता है ।

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