जानिए कैसे हो रहा तीसरी लहर में ओमिक्रोन का इलाज, घर पर ट्रीटमेंट के बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय

 
जानिए कैसे हो रहा तीसरी लहर में ओमिक्रोन का इलाज, घर पर ट्रीटमेंट के बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय

हैल्थ न्यूज डेस्क।। घर पर इलाज को लेकर कोरोना ओमिक्रॉन के संकट में कई तरह के सवाल हैं। यह जानना ऐसे में विशेषज्ञों से बेहद जरूरी है कि घर पर इलाज कैसे लेना है। कई लोग होम आइसोलेशन में इलाज करवार रहे हैं। लेकिन ऐसे में दवाइयां डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए। साथ ही दवाइयां देने का पैटर्न भी इस बार डॉक्टर्स का अलग है और दूसरी लहर की तरह लोगों को ट्रीटमेंट नहीं दिया जा रहा है।

दरअसल,विशेषज्ञों का मानना है कि पैरासिटामोल के इस्तेमाल को लेकर आप डॉक्टर की सलाह के हिसाब से ही अपना इलाज करवाएं। ‘धीरे-धीरे पिछले 2 सालों में हम इस बीमारी के बारे में बहुत कुछ जान पाए हैं और ऐसे बहुत सारे इलाज हैं जो शुरू हुए थे, मौजूदा स्थिति में कोरोना के इलाज को लेकर एम्स के डॉक्टर अंजन त्रिखा ने आकाशवाणी समाचार को बताया है, फिर धीरे धीरे हमें पता चला कि उनकी जरूरत नहीं है।

उनको बुखार बढ़े तो पानी से सिंकाई कर लें और सिंपटोमैटिक इलाज करें आज ओमिक्रॉन के साथ जो इंफेक्शन हो रहा है, इसमें जो लोग होम आइसोलेशन में हैं। अब इन दवाइयों की सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार जरुरत नहीं है जब तक कि किसी और वजह से न खानी पड़ें। डॉक्टर त्रिखा ने बताया, ‘पिछली लहर के दौरान जो विटामिन सी, जिंक और ऐसी बहुत सारी दवाइयां खा रहे थे और इतनी तादाद से खा रहे थे कि ये दवाइयां बाजार में मिलनी मुश्किल हो गई थीं। 

जानिए कैसे हो रहा तीसरी लहर में ओमिक्रोन का इलाज, घर पर ट्रीटमेंट के बारे में क्या है एक्सपर्ट की राय

अगर सांस लेने में तकलीफ हो या आपका सैचुरेशन लेवल गिरे तब आप डॉक्टर से बात कीजिए या अस्पताल जाइए, अगर पैरासिटामोल लेने के बाद भी बुखार ठीक नहीं होता है, 3-4 दिन हो गए हैं तो अपने डॉक्टर से बात कीजिए। डॉक्टरों का कहना है, ‘जो कॉमन लक्षण के साथ मरीज आ रहे हैं वो फ्लू जैसे लक्षण के साथ आ रहे हैं, जैसे गले में खराश, थोड़ा शरीर में दर्द है, थोड़ा सा बुखार है, बिल्कुल फ्लू वाले लक्षण के साथ लोग आ रहे हैं।

तो अस्पताल में वो लोग भर्ती हो रहे हैं, ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिन्हें और बीमारियां हैं’ फिर दूसरे ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्हें और कोई बीमारी थी, जैसे कैंसर, गुर्दे की बीमारी, जिन्हें डायलिसिस की जरूरत है।  बाकी लोग जो वार्ड में है वो स्टेबल हैं, किसी का बुखार नहीं जा रहा, किसी का बदन दर्द इतना है कि उसे इंजेक्शन की जरूरत है और कुछ लोग ऐसे जो घर में आइसोलेट नहीं कर पाते हैं। जो आईसीयू में हैं, जो वेंटिलेटर में हैं, उन्हें बहुत ही मुश्किल बीमारियां हैं, जैसे कोई लाइलाज कैंसर है, गुर्दे की बीमारी में दोनों किडनियां खराब हो गई हैं। 

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