देश Delta and Delta Plus वेरिएंट का सबसे ज्यादा खतरा 50 के पार लोगों को, क्या है सुरक्षित रहने के उपाय ?

 
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में सबसे ज्यादा कहर बरपाया है । इसके साथ ही खबरें भी सामने आ रही हैं कि, तीसरी लहर की आशंका बताई जा रही है । कोरोना संक्रमण की पहली लहर में बुजुर्गों पर संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा था दूसरी लहर में युवा वर्ग को खतरा था मगर अब तीसरी लहर में बच्चों पर संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है । विशेषज्ञों के अनुसार बताया जा रहा है कि, कोरोना संक्रमण के डेल्टा और डेल्टा प्लस वेरिएंट भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा है । इस वेरिएंट का शिकार सभी उम्र के लोग हो सकते हैं जिसकी सबसे बडी बात ये है कि, ये तेजी से फैलता है । डेल्टा वेरिएंट के म्यूटेशन को K417N नाम दिया गया हैं । . यह म्यूटेशन कोरोनावायरस के बीटा और गामा वैरिएंट्स में भी मिला था ।

बता दें कि, इंग्लैंड में जारी एक शोध के अनुसार इस वेरिएंट से 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के साथ यंग लोग ऐसे लोग जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली या वैक्सीन की पहली डोज ली है उन्हें संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है । इंग्लैंड में हुए शोध के अनुसार, यहां हुई ज्यादातर मौत 50 साल से अधिक उम्र के थे । बताया जा रहा है कि, इस वेरिएंट में सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्ग और युवाओं को है । मगर अब दुनिया भर के देशों में वैक्सीनेशन पर ध्यान दिया जा रहा है । वैक्सीनेशन की रफ्तार भले तेज हो गई हो मगर सबसे बड़ा सवाल है कि इस वेरिएंट का वैक्सीन लेने के बाद कितना खतरा है । इस शोध में बताया गया है कि वैक्सीन की पहली डोज के बाद 80% और दूसरे डोज के बाद 96% लड़ने की क्षमता आ जाती है. इंग्लैंड में हुए शोध के अनुसार भारत में लगायी जा रही वैक्सीन डेल्टा प्लस वेरिएंट से लड़ने में पूरी तरह कारगर है ।

इस शोध में बताया गया है कि, अगर आपने वैक्सीन ली है तो आसानी से आपके शरीर में संक्रमण का खतरा नहीं होगा, अगर संक्रमण फैला तो वैक्सीन उससे लड़ने में कारगर साबित होगी ।

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