महामारी के मुद्दे पर America क्या छिपाना चाहता है?

 
LK

जयपुर डेस्क !!! अमेरिकी मीडिया गेटवे पंडित के अनुसार, एक अमेरिकी जीवविज्ञानी ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी कर कहा कि अमेरिका में नए कोरोनावायरस वैक्सीन का विकास ऐसे वायरस के प्रकोप से पहले ही किया गया था। अमेरिका के उत्तर कैरोलिना विश्वविद्यालय के डॉ. राल्फ एस. बारिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 12 दिसंबर, 2019 अमेरिकी सरकार के साथ एक गुप्त समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था, जिसके मुताबिक उन्हें एमआरएनए नामक वैक्सीन का मूल्यांकन करना पड़ा था। इस विद्वान द्वारा बताई गई सच्चाई के अनुसार, अमेरिका में न्यू कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन का अनुसंधान और विकास चीन में इस वायरस के फैलने से पहले ही शुरू हुआ था। लेकिन यह क्यों है? अमेरिका वास्तव में महामारी के मुद्दे पर क्या छिपाना चाहता है?

दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार और राजनेता लगातार वायरस के जन्म स्थल के मुद्दे पर दूसरे देशों पर दोष मढ़ रहे हैं और इससे यह जाहिर है कि वह वास्तव में कुछ रहस्यों को छिपाना चाहता है। पर सत्य यही है कि 12 दिसंबर, 2019 को मोडेना नए कोरोनावायरस वैक्सीन का औपचारिक मानव परीक्षण शुरू हुआ था, लेकिन जब चीन ने अमेरिका में इस बात की जांच के लिए कॉल किया, तब अमेरिका ने स्पष्ट रूप से इसे अस्वीकृत कर दिया। अमेरिका में फौसी, बैरिक और मोडेना जैसी कंपनियों ने नए कोरोनावायरस के लिए टीकों का परीक्षण क्यों शुरू किया, जबकि उस समय वुहान सहित पूरी दुनिया ऐसे वायरस के बारे में अज्ञात थी? लेकिन इस सवाल पर अमेरिका ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।

बहुत ही प्रमाण हैं कि अमेरिका नए कोरोना वायरस के स्रोत के बारे में झूठ बोल रहा है। न्यू कोरोना वायरस चीन में फैलने से काफी पहले ही अमेरिका में सामने आया था। अमेरिका चीन की आलोचना करता रहता है, लेकिन यह सिर्फ मामले की सच्चाई को छुपाने के लिए है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) के निष्कर्षों के अनुसार, न्यू कोरोना वायरस चीन में नए कोरोना वायरस की खोज से बहुत पहले से अमेरिका में मौजूद रहा है।

दूसरी बात है कि 2019 में अमेरिका में भड़के ई-सिगरेट निमोनिया से भी संदेह पैदा किया गया है, क्योंकि ई-सिगरेट निमोनिया के लक्षण काफी हद तक न्यू कोरोना वायरस के न्यूमोनिया से मिलते-जुलते हैं। यह संदेह है कि तथाकथित ई-सिगरेट निमोनिया नए कोरोना वायरस निमोनिया का पहला प्रकोप है। क्या वास्तव में न्यू कोरोना वायरस निमोनिया और ई-सिगरेट निमोनिया के बीच कोई संबंध है? अमेरिका को एक जांच के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को संतोषजनक जवाब देना चाहिए।

जितनी जल्दी न्यूकोरोना वायरस की ट्रेसबिलिटी का मुद्दा सुलझाया जाएगा, उतनी ही मनुष्य महामारी से लड़ने में सफल रहेगा। हालांकि अमेरिका हमेशा वायरस की ट्रेसबिलिटी पर चीन में डब्ल्यूएचओ की जांच के परिणामों को लेकर संशय में रहा है। उधर, न्यू कोरोना वायरस के स्रोत का पता लगाने के मुद्दे के बारे में, चीन ने बार-बार अपने रुख पर जोर दिया है, और चीनी विदेश मंत्रालय ने भी गंभीर बयान दिए हैं। चीनी विदेश प्रवक्ता चाओ ली चैन ने कहा कि न्यू कोरोना वायरस के स्रोत का पता लगाना एक वैज्ञानिक मुद्दा है। अधिक से अधिक साक्ष्य यह दिखाने लगे हैं कि चीन में खोजे जाने से पहले ही यह वायरस कई अन्य देशों में प्रकट हुआ है।

उधर, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में चीनी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सभा में 63 देशों की ओर से संयुक्त भाषण देते हुए वैक्सीन के निष्पक्ष वैश्विक वितरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महामारी को हराने के लिए टीके शक्तिशाली उपकरण हैं और इसलिए इसे वैश्विक सार्वजनिक उत्पाद बनना चाहिए।

हालांकि, ‘वैक्सीन राष्ट्रवाद’ और अपनी जनसंख्या की जरूरत से कहीं अधिक जमाखोरी करने की प्रथा चिंताजनक है। आशा है कि अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता और सहयोग की भावना के मुताबिक, विकासशील देशों में टीकों की उपलब्धता, सामथ्र्य और उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इसे लेकर अनेक विकासशील देशों के प्रतिनिधियों ने भी कहा कि चीन का भाषण विकासशील देशों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है और उम्मीद है कि सभी देश टीकों के समान वितरण का समर्थन करेंगे।

नयूज स्त्रोेत आईएएनएस

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