4500 साल पुराना सूर्य मंदिर मिला इस मुस्लिम देश में, जानिए किसने और क्यों कराया था निर्माण

 
4500 साल पुराना सूर्य मंदिर मिला इस मुस्लिम देश में, जानिए किसने और क्यों कराया था निर्माण

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। दुनिया में कई ऐसे राज हैं जो अभी तक सामने नहीं आए हैं। वैज्ञानिक शोध के जरिए इन रहस्यों को जानने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच हर दिन नई जानकारी सामने आ रही है। इसी बीच मिस्र में एक 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर खोजा गया है, जिसकी पुष्टि पुरातत्वविदों ने की है। कहा जाता है कि यह सूर्य मंदिर मिट्टी से बना है जो मिस्र के पांचवें राजवंश के खोए हुए सूर्य मंदिरों में से एक है। मिस्र पर 2465 से 2323 ईसा पूर्व तक पांचवें राजवंश का शासन था।

पुरातत्वविदों ने मिस्र की राजधानी काहिरा के दक्षिण में इस मंदिर की खोज की है। यह सूर्य मंदिर अबू सर में राजा नुसेरे के मंदिर के नीचे पाया जाता है। मिस्र के पुरावशेष और पर्यटन मंत्रालय ने इस नई खोज की जानकारी दी है। इस अद्भुत खोज के बारे में मंत्रालय ने बताया कि मंदिर अबू सर के उत्तर में पाया गया था।

मंत्रालय ने आगे कहा कि अबू घोराब में इतालवी और पोलिश पुरातात्विक मिशनों ने मिट्टी की ईंट की इमारतों के अवशेष खोजे हैं। राजा नुसेरे के मंदिर के नीचे इमारतों के अवशेष मिले हैं। इटेलियन और पोलिश आर्कियोलॉजिकल मिशन के तहत किंग न्यूर के मंदिर पर काम चल रहा है।

मंत्रालय ने कहा है कि खोज से जुड़े निष्कर्ष बताते हैं कि यह पांचवें राजवंश के चार खोए हुए सूर्य मंदिरों में से एक हो सकता है। इन मंदिरों के बारे में जानकारी ऐतिहासिक स्रोतों से ही मिलती है। हालांकि, यह अभी तक नहीं मिला है। मिस्र के पुरावशेष और पर्यटन मंत्रालय का कहना है कि पांचवें राजवंश के छठे शासक ने अपना मंदिर बनाने के लिए इमारत के एक हिस्से को नष्ट कर दिया। सूर्य मंदिर के साथ-साथ कई वस्तुएं मिली हैं जो आगे के शोध में मदद करेंगी।

मिशन के तहत काम कर रही टीम को मिट्टी के बर्तन भी मिले हैं जो आगे के शोध में मदद करेंगे। इन उत्खननों के दौरान कुछ टिकटें भी मिली हैं, जिन पर पाँचवें वंश के राजाओं के नाम मिले हैं। तस्वीर को मंत्रालय द्वारा साझा किया गया है और कहा गया है कि अभी काम चल रहा है।

पुरातत्वविदों ने पहली बार 19वीं शताब्दी में सूर्य मंदिर की खोज की थी। इसके बाद एक ऐसी खोज हुई है जो बेहद अहम मानी जा रही है। कहा जाता है कि मिस्र में ऐसे छह या सात मंदिर थे। उनमें से केवल दो का अब तक पता चला है।

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