अक्षय तृतीया पर यह काम करने से रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी,जानिए इस दिन का महत्व

 
अक्षय तृतीया पर यह काम करने से रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी,जानिए इस दिन का महत्व

अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि खरीदारी से लेकर शादी तक किसी भी नई शुरुआत के लिए यह दिन शुभ होता है। इस दिन सोना-चांदी खरीदने के अलावा लक्ष्मी-नारायण की भी पूजा की जाती है। इस शुभ दिन यदि आप कोई काम शुरू करते हैं तो उसमें आपको सफलता जरूर मिलेगी।

शादी के लिए आज का दिन अच्छा है
अक्षय तृतीया के दिन सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशि में होते हैं। इसलिए इस दिन को विवाह, व्यवसाय शुरू करने और घर में प्रवेश करने जैसे शुभ कार्यों को करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। आज की तारीख उन लोगों के लिए बहुत ही शुभ है जिनके पास शादी करने का समय नहीं है, इस दिन कुछ भी गलत नहीं है।

यह समय है
अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त मंगलवार सुबह 5.18 बजे से बुधवार सुबह 7.32 बजे तक रहेगा. शाम 5:59 बजे से 12:26 बजे तक कलश पूजा और पूजा नियमानुसार की जा सकती है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन लक्ष्मीजी और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके पास साल भर धन की कमी नहीं होती है और वह हमेशा खुश रहता है। वहीं अक्षय तृतीया के दिन कुछ ऐसे कामों का जिक्र किया गया है जिन्हें करना मना है. इन कामों को करने से देवी लक्ष्मी आपसे हमेशा के लिए नाराज हो सकती हैं।

अक्षय तृतीया पर यह काम करने से रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी,जानिए इस दिन का महत्व

इन बातों का रखें ध्यान
अक्षय तृतीया पर कभी भी जनोई न पहनें। मान्यता है कि ऐसा करने से दुर्भाग्य आता है।

अक्षय तृतीया के दिन कभी भी देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की अलग-अलग पूजा करने की गलती न करें।

इस दिन घर के किसी भी हिस्से में अंधेरा नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं।

तुलसी के पत्तों को बिना धोए इस्तेमाल करना अशुद्ध माना जाता है।

अक्षय तृतीया पर तामसिक भोजन न करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें। किसी के लिए बुरे विचार न लाएं।

क्या है अक्षय तृतीया का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था। भगवान कृष्ण के कारण अक्षय तृतीया के दिन द्रौपदी को अक्षय कलश मिला था। इसी दिन राजा जनक हल जोतते हुए कलश में सीता से मिले थे। इस दिन समुद्र मंथन भी शुरू हुआ था और उसमें से निकलने वाले अमृत को भी मटके में भर दिया गया था। कलश को 33 हजार करोड़ देवी-देवताओं का वास कहा जाता है। इसलिए अक्षय तृतीया के दिन कलश की पूजा का विशेष महत्व है।

आज ही दान करें
अक्षय तृतीया के दिन पंखा, चावल, गुड़, चीनी, दही, जौ या सत्तू और वस्त्र आदि का दान करें। शक्ति हो तो गाय या सोना भी दान करना चाहिए। कहा जाता है कि अक्षय तृतीया पर दिया गया उपहार हमें अगले जन्म में कई बार मिलता है और इस जन्म में हमारा मन शांत और शुद्ध हो जाता है और अगले जन्म में हमें सुखद फल मिलता है.

Post a Comment

From around the web