"भारत का ये गांव है एशिया का सबसे साफ व सुंदर गांव", जहां हर घर में है शौचालय, प्लास्टिक पर लगा है बैन

 
"भारत का ये गांव है एशिया का सबसे साफ व सुंदर गांव", जहां हर घर में है शौचालय, प्लास्टिक पर लगा है बैन

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। वर्षों से, आपने भारत में बढ़ते प्रदूषण और बिगड़ती हवा के बारे में खबरें सुनी होंगी। यह अफ़सोस की बात होगी कि देश के बढ़ते प्रदूषण के स्तर से इसकी प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। लेकिन यह देश का केवल एक पहलू है। दूसरे, हमारे देश के कई हिस्से न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अपनी स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध हैं। आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जो भारत में है और जिसे एशिया के सबसे स्वच्छ गांव का दर्जा प्राप्त है।

'गार्डन ऑफ गॉड' के नाम से मशहूर इस गांव को मल्लिनोंग कहा जाता है जो मेघालय में स्थित है। यह गांव शिलांग से केवल 78 किमी दूर है और भारत का सबसे स्वच्छ गांव है। वर्ष 2003 में डिस्कवर इंडिया द्वारा इस गांव को एशिया का सबसे स्वच्छ गांव घोषित किया गया था। तब से गांव में साफ-सफाई बनी हुई है।

क्या है गांव की खासियत
अब सवाल यह है कि इस गांव को इतना साफ और अनोखा क्या बनाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2007 से गांव के हर घर में शौचालय है। यानी किसी को भी खुले में शौच नहीं करना चाहिए। पूरे गांव में बांस के कूड़ेदान रखे गए हैं। पेड़ से गिरने वाले अधिकांश सूखे पत्ते सीधे कूड़ेदान में गिर जाते हैं ताकि वे जमीन पर जमा न हों। सबसे बड़ी बात यह है कि गांव में प्लास्टिक की थैलियों के साथ सिगरेट पीना भी प्रतिबंधित है। यहां के नियम इतने सख्त हैं कि कोई भी इन चीजों का इस्तेमाल करते हुए पाया जाता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है।

ग्रामीण आत्मनिर्भर
गांव के लोग खाद बनाने के लिए किसी बाहरी स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। जमीन में एक बड़ा गड्ढा खोदा जाता है और कचरे को भर दिया जाता है जो खाद में बदल जाता है। हर कोई इसका इस्तेमाल करता है। यहां के लोग न सिर्फ अपने घर की सफाई करते हैं बल्कि घर के बाहर की सफाई भी खुद करते हैं और पेड़ लगाना यहां के लोगों के जीवन का अहम हिस्सा है। आपको बता दें कि इस गांव में खासी जनजाति के लोग रहते हैं। इस जनजाति से जुड़ी सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें पितृसत्ता नहीं है, केवल सत्ता के प्रति आज्ञाकारिता है। खासियों ने मेघालय में एक बहुत ही अनोखा रूट ब्रिज भी बनाया है, जो लगभग 180 साल पुराना है, लेकिन यह अभी भी उतना ही मजबूत है जितना इसे बनाया गया था।

Post a Comment

From around the web