इस नई तकनीक के साथ इंडिगो ने लैंड कराया विमान, ऐसा करने वाला एशिया प्रशांत क्षेत्र का पहला देश बना भारत

 
इंडिगो ने इस नई तकनीक के साथ लैंड कराया विमान, ऐसा करने वाला एशिया प्रशांत क्षेत्र का पहला देश बना भारत!

लाइफस्टाइल डेस्क।।  इंडिगो ने भारत निर्मित उपग्रह आधारित संवर्धित प्रणाली 'गगन' (जीपीएस सहायता प्राप्त जीईओ संवर्धित नेविगेशन) की मदद से गुरुवार को राजस्थान के किशनगढ़ हवाई अड्डे पर एक परीक्षण उड़ान को सफलतापूर्वक उतारा। इसे एयर नेविगेशन सिस्टम के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

भारत के अलावा इस तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका, यूरोप और जापान में ही किया गया है। इस प्रणाली को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इंडिगो के एटीआर-72 विमान पर इसका परीक्षण किया गया है। इंडिगो के निदेशक और सीईओ रोंजॉय दत्ता ने कहा कि 'गगन' नागरिक उड्डयन के लिए गेम चेंजर साबित होगी। उन्होंने कहा कि इससे हवाई यात्रा का आधुनिकीकरण होगा।

यह क्या मदद करेगा
सिस्टम को डीजीसीए ने 2015 में वर्टिकल गाइडेंस (एपीवी-1) और एन-रूट (आरएनपी 0.1) संचालन के साथ अपने दृष्टिकोण के लिए अनुमोदित किया था। वर्टिकल गाइडेंस (एलपीवी) के साथ लोकलाइज़र परफॉर्मेंस बिना ग्राउंड-बेस्ड नेविगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के एयरक्राफ्ट को लैंड करने में मदद करता है। यह सेवा जीपीएस और 'गगन' जियो स्टेशनरी सैटेलाइट पर आधारित है। गगन नेविगेशन का उपयोग करके विमान को उतारने के लिए साइड और वर्टिकल निर्देश प्रदान करेगा। अंतिम मंजूरी मिलते ही इस तकनीक को देश की सभी वाणिज्यिक एयरलाइनों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उन हवाई अड्डों पर उड़ान भरना आसान हो जाएगा जहां महंगे लैंडिंग सिस्टम मौजूद नहीं हैं। साथ ही माना जा रहा है कि इससे उड़ान में देरी की समस्या कम होगी और ईंधन की बचत होगी।

डीजीसीए का आदेश

इंडिगो ने इस नई तकनीक के साथ लैंड कराया विमान, ऐसा करने वाला एशिया प्रशांत क्षेत्र का पहला देश बना भारत!
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पिछले साल जुलाई में देश के सभी पंजीकृत विमानों को 'गगन' प्रणाली से लैस करने का आदेश दिया था। बयान में कहा गया है कि प्रौद्योगिकी छोटे हवाई अड्डों पर उपयोगी होगी। इंडिगो की ट्रायल फ्लाइट में डीजीसीए के अधिकारी भी सवार थे।

एएआई ने मछुआरों के लिए भी तकनीक विकसित की है
एएआई ने इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशनिक इंफॉर्मेशन सर्विस के सहयोग से 'गगन' संदेश सेवा भी शुरू की है। यह मछुआरों और बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को चेतावनी संदेश भेजेगा।

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