कोई कहता है हिंदू मंदिर, तो कोई बौद्ध स्तूप, पाकिस्तान की इस मीनार में छिपा है रहस्यमयी खजाना

 
कोई कहता है हिंदू मंदिर, तो कोई बौद्ध स्तूप, पाकिस्तान की इस मीनार में छिपा है रहस्यमयी खजाना

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। किलों और मीनारों की दुनिया में कोई कमी नहीं है। भव्य और प्राचीन मीनारें एक से बढ़कर एक  हैं, जो लोगों को हैरान करते हैं। इनमें बेहद रहस्यमयी हैं कई किले और मीनारें। यह मीनार पाकिस्तान के रहीम यार खान जिले में स्थित है। यह मीनार रहस्यों से भरी हुई है, क्योंकि इसके नीचे छिपे खजाने को आज तक कोई नहीं खोज पाया। आईए जानते हैं एक ऐसे ही मीनार के बारे में जिसे रहस्यमयी खजाने के लिए जाना जाता है। 

इस खजाने को लेकर आज भी रहस्य बरकार है। कहा जाता है कि 19वीं सदी में अंग्रेजों के शासन के दौरान एक कर्नल मीनार की खोज के लिए निकला था। वहां पर पहुंचने के बाद इस अधिकारी ने मीनार की खुदाई का आदेश दिया। लेकिन खजाने की खुदाई के दौरान अजीबो गरीब मक्खियों का झुंड बाहर आ गया जिनके डंक मारने से उसकी मौत हो गई। इसके बाद खुदाई को रोक दिया गया। इस मीनार का नाम पतन है जो पाकिस्तान के रहीम यार खान जिले में स्थित है। बताया जाता है कि इस रहस्यमयी मीनार के नीचे खजाना छिपा है, लेकिन आजतक इस खजाने के रहस्य को कोई सुलझा नहीं पाया है। 

 इस इमारत की डिजाइन को लेकर बहुत कम जानकारी है। ज्यादातर लोगों का कहना है कि इसको हड़प्पा घाटी सभ्यता के दौरान बनाया गया था। माना जाता है कि रहीम यार खान से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित पतन मीनार पांच हजार साल पुरानी है। कुछ लोगों का कहना है कि यह बौद्ध स्तूप था जिसमें सिर्फ एक स्तंभ बचा है।

रहस्यमयी खजाना छिपा है पाकिस्तान की इस मीनार में, इसे कोई कहता है हिंदू मंदिर, तो कोई बौद्ध स्तूप

पतन मीनार का अर्थ है 'टॉवर ऑन द फोर्ड'। इस इमारत में पश्चिम की तरफ एक ही द्वार है।इस मीनार का नाम पट्टन पुर के नाम पर रखा गया है। बताया जाता है कि पट्टन सिंधु नदी की एक शाखा घाघरा नदी के तट पर बसा एक हरा-भरा शहर था। बताया जाता है कि इस मीनार को वॉच टावर के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। 

 सिकंदर की सेना जहां भी जाती थी, पूरे के पूरे नगर जला दिए जाते थे। सिकंदर ने यहां पर एक छावनी की स्थापना की और स्थानीय जनजातियों पर नजर रखने के लिए इस मीनार इस्तेमाल किया जाता था। कुछ पुरातत्वविदों का मानना है कि इस इमारत का निर्माण सिकंदर महान ने किया था। 18 वीं शताब्दी में पतन मीनार को तोड़ा गया तो एक ईंट मिली जिस पर संस्कृत में लिखा गया था।उनका कहना है कि सिकंदर जब भारत में अपने सैन्य अभियान के दौरान इस क्षेत्र से जा रहा था उसी दौरान उसने इसका निर्माण कराया था। 

इस तीन मंजिला इमारत की डिजाइन एक खास तरह की है। इस इमारत के दो मंजिलों को पूराने शासकों ने नष्ट कर दिया। इस मीनार के निर्माण को लेकर लोग अलग-अलग दावे करते हैं।  तो वहीं कुछ पुरातत्वविदों का कहना है कि यह एक हिंदू मंदिर था। इस इमारत में कई ऐसी चीजें हैं जो हिंदू मंदिरों में होती हैं। उनका कहना है कि एक खास लोगों के लिए यह मंदिर बनाया गया था। इस मीनार के निर्माण और यहां छिपे खजाने का रहस्य आज तक बरकरार है।
 

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