तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े कुछ अजीबो गरीब रहस्य जिनके आगू वैज्ञानिकों ने टेके घुटने, यकिनन नहीं जानते होंगे आप

 
तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े कुछ अजीबो गरीब रहस्य जिनके आगू वैज्ञानिकों ने टेके घुटने, यकिनन नहीं जानते होंगे आप

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। इस ​दुनिया में कई जगहें अनेकों रहस्यों से भरी पडी है। भारत को एक धार्मिक देश माना जाता है। साथ ही ऐसे बहुत से मंदिर हैं भारत में जो अपने चमत्कार और रहस्य के लिए पुरी दुनिया में जाने जाते हैं। यहां ऐसे बहुत से मंदिर हैं जिनके रहस्य आज तक एक अनसुलझी पहेली बने हुये है। वैज्ञानिक भी इनके आगे हार मान गये हैं। इन्ही मंदिरों में से एक भगवान तिरुपति बालाजी का मंदिर भी है। गरीब और अमीर दोनों ही भगवान के इस दरबार में सच्ची श्रद्धाभाव के साथ अपना सिर झुकाते हैं। तिरुमाला की पहाड़ियों पर स्थित इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने हर साल लाखों लोग  आते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान के सामने प्रार्थना करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आपको बता दें कि भगवान तिरुपति बालाजी का चमत्कारिक और रहस्यमई मंदिर भारत समेत पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और यह मंदिर भारतीय वास्तु कला और शिल्प कला का उद्धरण है। साथ ही भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां आकर तिरुपति बालाजी मंदिर में अपने बाल दान करते हैं। इस अलौकिक और चमत्कारिक मंदिर से ऐसे रहस्य जुड़े हुए हैं जिनके बारे में शायद ही कोई जानता हो। तो आइए जानते हैं इस मंदिर से जुड़े हुए रहस्य के बारे में…

1. तिरूपती भगवान के इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान खुद विराजमान हैं। और जो भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर बाल लगे हुए हैं, वह असली हैं और सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह कभी उलझते नहीं हैं और यह बाल हमेशा मुलायम रहते हैं। 

2. यहां का दुसरा रहस्य है कि जैसै ही आप भगवान बालाजी के गर्भ गृह में जाकर देखेंगे तो आपको दिखेगा की मूर्ति गर्भ गृह के बीच में स्थित है लेकिन जैसे ही आप गर्भ गृह से बाहर आएंगे तो आप भी चौंक जाएंगे क्योंकि बाहर आकर ऐसा लगता है कि भगवान की मूर्ति दाहिनी तरफ स्थित है। आखिर यह लोगों का भ्रम है या फिर भगवान का कोई चमत्कार है? यह रहस्य अभी तक रहस्य बना हुआ है।

3. यहां के लोगों का ऐसा मानना है कि भगवान के इस रूप में मां लक्ष्मी भी समाहित हैं, यही कारण है कि श्री वेंकटेश्वर स्वामी को स्त्री और पुरुष दोनों के वस्त्र पहनाने का रिवाज है। भगवान की प्रतिमा को प्रतिदिन नीचे धोती और ऊपर साड़ी में सजाया जाता है।

तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े कुछ अजीबो गरीब रहस्य जिनके आगू वैज्ञानिकों ने टेके घुटने, यकिनन नहीं जानते होंगे आप

4. इस मंदिर के वातावरण को काफी ठंडा रखा जाता है परंतु इसके बावजूद भी बालाजी को गर्मी लगती है। भगवान की प्रतिमा को पसीना आता है और पसीने की बूंदे देखी जा सकती हैं। आपको बता दें कि भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा एक विशेष पत्थर से बनी हुई है। मगर यह पूरी तरह से जीवंत लगती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे भगवान विष्णु जो स्वयं यहां पर विराजमान हैं। 

5. यहीं थोडी दूर भगवान वेंकटेश्वर के इस मंदिर से 23 किलोमीटर दूरी पर एक गांव है, और यहां बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में चढ़ाया जाने वाला पदार्थ जैसे फूल, फल, दही, घी, दूध, मक्खन आदि इसी गांव से आता है। इस गांव के लोग बहुत ही अनुशासित हैं और नियमों का पालन कर जीवन जीते हैं। 

6. माता की मौजूदगी का पता तब चलता है जब हर गुरुवार को बालाजी का पूरा श्रृंगार उतारकर उन्हें स्नान करवाकर चंदन का लेप लगाया जाता है और जब इस लेप को हटाया जाता है तो हृदय पर लगे चंदन में देवी लक्ष्मी जी की छवि उभर कर आती है। भगवान वेंकटेश्वर के हृदय में माता लक्ष्मी जी की आकृति नजर आती है। 

7. भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में एक दीया हमेशा जलता रहता है आखिर इस दीपक को कब और किसने जलाया था, इसके बारे में भी किसी को कुछ पता नहीं है। सबसे आश्चर्य कर देने वाली बात यह है कि इस दीपक में कभी भी तेल या घी नहीं डाला जाता है। यह दीया वर्षों से जल रहा है। 

8.  वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के मुख्य द्वार पर दरवाजे के दाएं तरफ एक छड़ी है और इस छड़ी के बारे में ऐसा बताया जाता है कि बचपन में इस छड़ी से ही भगवान बालाजी की पिटाई की गई थी। इस वजह उनकी ठुड्डी पर चोट लग गई थी। इसी कारणवश तब से लेकर आज तक उनकी ठुड्डी पर शुक्रवार को चंदन का लेप लगाया जाता है ताकि उनका घाव भर जाए।

9. बताया जाता है कि मंदिर में मूर्ति हमेशा नम रहती हैं। भगवान के इस मंदिर में जो लोग जाते हैं, उनका कहना है कि भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति पर कान लगाकर सुनने पर समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है। 

10. पचाई कपूर ऐसा कहा जाता है कि इसे किसी भी पत्थर पर लगाया जाता है तो वह कुछ समय के बाद ही चटक जाता है परंतु भगवान की प्रतिमा पर इसका कोई भी असर नहीं होता है। भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा पर खास तरह का पचाई कपूर लगाया जाता है।

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