येइमारत है दुनिया में सबसे रहस्यमयी, जिसे बह रही नदी के ऊपर अजीबो गरीब ढंग से बनाया गया

 
येइमारत है दुनिया में सबसे रहस्यमयी, जिसे बह रही नदी के ऊपर अजीबो गरीब ढंग से बनाया गया

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। दुनिया को ऐसी इमारतें विज्ञान और वास्तुशिल्प दी हैं जिनकी कल्पना भी आम इंसान नहीं कर सकता है. एक ऐसी वास्तुशिल्क की नायाब इमारत के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जो खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि अपनी वास्तुकला के लिए भी जानी जाती है. कोलंबिया के शहर इपियालेस के पास ये इमारत एक घाटी से बह रही नदी के ऊपर बनाई गई है. इस इमारत को घाटी के अंदर बनाया गया है जहां गिटार नदी बहती है. जिसे देखकर कोई भी हैरान रह सकता है. जो वास्तव में एक चर्च है. इक्वाडोर की सीमा के पास बनाई गई ये इमारत अब एक आकर्षक का केंद्र बन चुकी है. इस इमारत को रोमन कैथोलिक बेसिलिका के नाम से जाना जाता है. इसे लास लाजस कैथेड्रल या फिर "लास लाजस अभयारण्य" के रूप में भी जाना जाता है.

वर्तमान चर्च को बनाने में 33 साल का समय लगा था. जिसे साल 1916 से 1949 के बीच पूरा किया गया. इसे बनाने में स्थानीय लोगों ने मदद की. कैथेड्रल को करीब से देखने पर आपको कुछ परी-कथा वाले यूरोपीय महल की याद आ जाएगी. यह इमारत घाटी के नीचे से 100 मीटर ऊंची है, जिसके दूसरे सिरे पर 50 मीटर लंबा बना हुआ है. रोमन कैथोलिक बेसिलिका नाम की ये इमारत एक तरह से हवा में लटकी हुई है. इसीलिए इसे कोलंबिया का सबसे सुंदर चर्च माना जाता है. दरअसल, ये सब कुछ 1754 में हुई एक चमत्कारी घटना के बाद शुरु हुआ. जब  मारिया म्यूसेस नाम की एक अमेरिंडियन महिला और उसकी बेटी रोजा, जो मूक-बधिर थी, एक शक्तिशाली तूफान में फंस गई. आपको आश्चर्य हो सकता है कि किसी ने इतनी खतरनाक जगह पर चर्च को बनाने के बारे में क्यों सोचा होगा. तो आपको इसके पीछे की वजह भी बताते हैं. 

येइमारत है दुनिया में सबसे रहस्यमयी, जिसे बह रही नदी के ऊपर अजीबो गरीब ढंग से बनाया गया

ऐसा माना जाता है कि वर्जिन मैरी के प्रकट होने से रोजा ठीक हो गई. जब इस चमत्कारी घटना की खबर लोगों को मिली तो सब हैरान रह गए. उसके बाद एक बूढ़े अंधे आदमी ने कुछ और करने की सोची. कहा जाता है कि जब दो महिलाएं आश्रय की तलाश में थीं, तो उन्हें लगा कि एक मजबूत ताकत उन्हें एक गुफा की ओर ले जा रही है, जहां वे दीवारों में से एक पर हमारी वर्जिन मैरी की छवि देख पा रही थीं. तब छोटी बच्ची छवि की ओर इशारा करते हुए अपनी मां को चिल्लाई. 

जब वह पर्याप्त धन इकट्ठा करने में कामयाब हो गया, तो दूसरा चमत्कार हुआ, क्योंकि बूढ़े व्यक्ति की आंखों की रोशनी वापस आ गई. उन्होंने गांव-गांव की यात्रा की और लोगों से उस स्थान पर एक चर्च बनाने में मदद करने के लिए कहा. जहां वर्जिन मैरी दिखाई दी थी. इसके अलावा, उनका सपना तब साकार हुआ जब अठारहवीं शताब्दी के अंत में चर्च बनकर खड़ा हो गया.

जहां पर वर्जिन मैरी की छवि दिखाई देती थी. स्थानीय अधिकारियों और निवासियों को विशाल कैथेड्रल बनाने में कम से कम दो शताब्दी का वक्त लगा. वर्तमान संरचना गोथिक को दोबारा से तैयार किया गया. जो देखने में काफी पुरानी लगती है. उसके बाद यहां आने वाले तमाम तीर्थयात्रियों ने वर्जिन मैरी की छवि को देखना शुरू कर दिया. कई सालों तक यहां इसी तरह के चमत्कारी उपचार के कई अन्य मामले सामने आए और अधिक से अधिक लोग वहां पहुंचने लगे. 

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