नरक में जी रही है यहां की महिलाएं, रेप साबित करने के लिए भी चाहिए 4 गवाह

 
नरक में जी रही है यहां की महिलाएं, रेप साबित करने के लिए भी चाहिए 4 गवाह

लाइफस्टाइल डेस्क । । दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां महिलाएं अब भी नर्क के समान हालात में रह रही हैं। जहां पर आज भी इन महिलाओ पर कई जुल्म होते हुए आप देख सकते है। इन्‍हीं में से एक देश है सऊदी अरब, यहां महिलाओं को कई बेसिक अधिकार तक हासिल नहीं हैं। यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तब उछला, जब वहां महिलाओं के हक के लिए गर्ल्स काउंसिल का गठन किया गया। पर काउंसिल की पहली पहली मीटिंग में ही महिलाओं को साथ नहीं बैठाया गया।

नरक में जी रही है यहां की महिलाएं, रेप साबित करने के लिए भी चाहिए 4 गवाह

यहां की महिलाओं की हालत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं उन्‍हें घर से अकेले निकलने तक पर पाबंदी है। जानिए वहां के ऐसे नियम, जिनकी आप कल्‍पना तक नहीं कर सकते। कोई भी महिला बिना दो पुरुष गवाहों के प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकती है। मजेदार बात तो ये है कि पुरुष गवाह के बिना महिलाओं की पहचान की पुष्टि नहीं होती है। यही नहीं, जो दो पुरुष महिला की पुष्टि करने आते हैं उनकी विश्वसनीयता की पुष्टि करने के लिए भी चार और पुरुष गवाहों की जरूरत होती है।यहां महिलाएं किसी भी खेल में हिस्‍सा नहीं लेतीं। अगर कोई ऐसा करे तो लोगों का गुस्‍सा फूट पड़ता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2012 के ओलंपिक गेम्स में पहली बार सऊदी अरब की महिला खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। लेकिन इसके बाद देश में काफी विरोध हुआ था। पूरी दुनिया ने देखा था कि उस समय फीमेल एथलीट्स ओलिंपिक में पूरे शरीर को कपड़ों से ढके हुए और हिजाब में दौड़ती नजर आई थीं।

कई बार यह कहा जाता है कि सऊदी अरब में रेप करने वालों के खिलाफ सख्‍त कानून है। पर सच्‍चाई ये है कि यहां रेप बड़ी संख्‍या में होते हैं। शायद आपको ये पता नहीं होगा कि यहां पत्नी के साथ जबरन संबंध बनाने को रेप नहीं माना जाता। दूसरी रेप की घटनाओं में किसी आरोपी को तब तक सजा नहीं दी जा सकती, जब तक रेप के चार चश्मदीद ना हों. इसलिए वहां रेप साबित करना एक मुश्किल काम है। कुछ मामले तो ऐसे भी देखे गए हैं कि अगर महिला का रेप हो और उस समय वह अकेली घर से निकली हो या उसके साथ कोई पुरुष गार्जियन ना हो, तो उसे भी सजा दी जाती है।वहां महिलाएं अकेले सफर नहीं कर सकतीं। उनके साथ किसी पुरुष गार्जियन का होना आवश्‍यक है। यही नहीं, महिलाओं को सफर करने के लिए पुरुष की सहमति की आवश्‍यकता होती है। हालत ये हैं कि अगर किसी महिला का पति जीवित नहीं है तो उसे अपने बेटे से लिखित अनुमति लेनी होती है।सउदी में हर महिला का कोई ना कोई पुरुष गार्जियन होना आवश्‍यक है। वो चाहे उसका पिता हो, या अंकल, भाई, बेटा। इतना सब होने के बावजूद वहां महिलाएं पढ़ाई के मामले में पुरुषों से आगे हैं। लेकिन नौकरी में इनकी संख्या बहुत कम है।सऊदी अरब में महिलाओं की ड्राइविंग को लेकर कोई नियम नहीं है लेकिन वहां इसे अच्‍छा नहीं माना जाता। कई विरोध प्रदर्शनों के बाद अब महिलाओं को केवल बच्चों को स्कूल छोड़ने और परिवार के किसी सदस्‍या को अस्पताल पहुंचाने के लिए ड्राइव करने का अधिकार मिल गया है।

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