अगर आप भी बनने वाले है पहली बार पैरेंट्स, तो पहले जान लें इन तरीकों से शिशु की स्किन का ख्याल?

 
 अगर आप भी बनने वाले है पहली बार पैरेंट्स, तो पहले जान लें इन तरीकों से शिशु की स्किन का ख्याल?

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। बच्चे की स्किन और बालों में जन्म के बाद शुरुआती समय में कुछ बदलाव आता है। उसकी स्किन का खास ध्यान ऐसे में इस दौरान रखने की जरूरत होती है। शिशु की त्वचा से पपड़ी भी इस समय निकली है जो एक सामान्य प्रक्रिया है। वेरनिक्स इसे कहते हैं। नवजात की त्वचा एक्सपर्ट अनुसार, बेहद कोमल व नाजुक होती है। इसे रगड़ना इसलिए नहीं चाहिए। उसे क्रीम या लोशन लगाने भी इसके अलावा इस दौरान जरूरी नहीं होता है। नए-नए पेरेंट्स ऐसे में अगर आप बने हैं या बनने जा रहे हैं जो आपको शिशु की स्किन की आज हम देखभाल करने के कुछ टिप्स बताते हैं...

बच्चे की त्वचा को पोषित करने के लिए तेल मालिश
ये नेचुरल और बिना खुशबू के होते हैं। इससे बच्चे की स्किन गहराई से पोषित व मुलायम होती है। इसके साथ ही तेल मसाज करने से बच्चे की हड्डियां व मांसपेशियां मजबूत होती है। छोटे बच्चे की त्वचा को पोषित करने के लिए आप तेल मालिश करें। इसके लिए आप नारियल, बादाम, जैतून आदि का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं।

माइल्ड साबुन का इस्तेमाल करें
उसकी स्किन पर कैमिकल वाली चीजें इस्तेमाल करने से रैशेज या एलर्जी की समस्या हो सकती है। नवजात शिशु की त्वचा बेहद कोमल व नाजुक होती है। इसलिए आप उसके लिए माइल्ड प्रोडक्ट ही चुनें। अगर बच्चे को रैशेज की परेशानी हो तो कुछ दिनों में ये ठीक ना होने पर तुरंत एक्सपर्ट की सलाह लें।

अगर आप भी बनने वाले है पहली बार पैरेंट्स, तो पहले जान लें इन तरीकों से शिशु की स्किन का ख्याल?

बच्चे की त्वचा पर ज्यादा पाउडर ना लगाएं
इसके साथ ही कैमिकल व ज्यादा खुशबू वाला पाउडर लगाने से बचें। इससे शिशु की स्किन पर एलर्जी, रैशेज आदि हो सकते हैं। नहाने के बाद बच्चे की स्किन को अच्छे से सुखाकर ही कम मात्रा में ही पाउडर लगाएं।

बच्चे को साफ कपड़े पहनाएं
बिना धुले कपड़े बच्चे को पहनाने से उसे ड्राई स्किन, रैशेज या अन्य कोई स्किन प्रॉब्लम हो सकती है। आप चाहे तो अपने नवजात शिशु को 1-2 दिन छोड़कर नहला सकते हैं। अगर शिशु के चेहरे, सिर, कोहनी या घुटनों पर लाल रैशेज हो तो ये एक्जिमा के लक्षण हो सकते हैं। मगर उसके शरीर को गीले कपड़े से रोजाना साफ करके साफ व कोमल कपड़े पहनाएं। इसके अलावा अगर घर में कोई स्किन एलर्जी पीड़ित हो तो उसे बच्चे से दूर रखें।

बच्चे के नाखूनों की सफाई रखें
ऐसे में वे नाखून अपने ही चेहरे या शरीर पर मारकर खुद को नुकसान पहुंचा सकता है। छोटे बच्चों के नाखून जल्दी ही बढ़ जाते हैं। इसलिए आप समय-समय पर नेल कटर की मदद से बच्चे के नाखून काट लें। इसके अलावा नाखूनों में गंदगी होने से वह बीमार पड़ सकता है।

डायपर रैशेज से करें बचाव
इससे बचने के लिए शिशु का समय-समय पर डायपर बदलते रहें। इसके साथ ही डायपर गीला होने पर बच्चे की स्किन को अच्छे से सुखाकर ही नया डायपर पहनाएं। छोटे बच्चों को डायपर रैशेज की समस्या होने का खतरा रहता है। इसके कारण शिशु को खुजली, रैशेज और रेडनेस की समस्या होती है।

तेज धूप में ले जाने से बचें
ऐसे में आप उसे विटामिन डी दिलाने के लिए सुबह के समय कुछ देर तक ही धूप में ले जाएं। शिशु की स्किन बेहद नाजुक होती है। ऐसे में तेज धूप के संपर्क में आने से उसकी स्किन में सनबर्न हो सकती है।

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