Parenting Tips: सिंगल चाइल्ड के है माता पिता तो ऐसे करें Parents उसकी परवरिश, नहीं करेगा बच्चा अकेला महसूस

 
Parenting Tips: सिंगल चाइल्ड के है माता पिता तो ऐसे करें Parents उसकी परवरिश, नहीं करेगा बच्चा अकेला महसूस

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। वैसे तो एक ही बच्चा पैदा करने का फैसला माता-पिता का होता है, लेकिन कई बार बच्चे इस वजह से मानसिक परेशानी के शिकार हो जाते हैं। एक अकेले बच्चे में गुस्सैल स्वभाव, अंतर्मुखता, चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण होते हैं। अपनी ही उम्र का बच्चा यानी भाई या बहन न होने पर बच्चा अकेलापन महसूस करने लगता है। कभी-कभी बच्चा इतनी परेशानी उठा लेता है कि वह डिप्रेशन में भी आ जाता है। अगर आपका बच्चा भी इकलौता बच्चा है तो आप उसकी देखभाल इस तरह कर सकती हैं।

माता-पिता को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
अगर आपकी संतान भी इकलौती संतान है तो उसका ध्यान रखें। अधिक समय न दे पाने के कारण बच्चे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। उसकी उम्र का कोई भाई या बहन नहीं होने के कारण वह तनाव महसूस करता है। अकेले रहने से बच्चे बाहरी दुनिया से अलग-थलग महसूस करते हैं। बच्चे भी चिंता के शिकार हो सकते हैं।

Parenting Tips: सिंगल चाइल्ड के है माता पिता तो ऐसे करें Parents उसकी परवरिश, नहीं करेगा बच्चा अकेला महसूस

बच्चे को ऐसे पालें
बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भावनाओं, पारिवारिक संबंधों, भविष्य आदि के बारे में नियमित जानकारी देते रहें। माता-पिता को बच्चे ही प्यारे होते हैं, लेकिन उन्हें खराब मत करो। बच्चों की परेशानी को नजरअंदाज न करें। उनके दोस्त बनो। कुछ बातों में बच्चे का साथ दें और कुछ बातों को इग्नोर करें।

अपने मन की बात
बच्चे ही डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं। इसलिए उन्हें समय दें। उनके साथ ज्यादा कठोर मत बनो। ताकि बच्चा आपके मन की बात कह सके।

विशेषज्ञों से सलाह लें
अगर आपको बच्चे के व्यवहार में कोई फर्क नजर आता है तो आपको उसे मनोवैज्ञानिक या काउंसलर के पास ले जाना चाहिए।

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आप विशेष महसूस करते हैं
अगर आपको बच्चा शांत लगे तो उसे अपनी अहमियत समझाएं। बच्चे को स्पेशल फील कराना न भूलें।

कृपया समय दें
आपको अपना समय बच्चे को देना चाहिए। अक्सर माता-पिता बच्चे को कोई काम देकर किसी और काम में व्यस्त हो जाते हैं। ऐसे में आप अपना पूरा समय बच्चे को दें। इसे नज़रअंदाज़ न करें। इससे बच्चा आपके दिल की बात समझेगा और आपके मन की बात जरूर कहेगा। संतान की जिम्मेदारी भी कम रहेगी। ऐसे में बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं ताकि उसे अकेलापन महसूस न हो।

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