अगर आपका बच्चा भी रोते-रोते रोक लेता हैं सांस, जानिए इसका कारण व उपाय

 
अगर आपका बच्चा भी रोते-रोते रोक लेता हैं सांस, जानिए इसका कारण व उपाय

लाइफस्टाइल न्यूज डेस्क।। अगर आप ​भी किसी बच्चे के मां बाप है और इस बात को लेकर परेशान  है कि आपका बच्चा रोते रोते अपनी सांस को रोक लेता है। ऐसा इसलिए होता है ​क्योंकि बार बच्चे रोते-रोते, गुस्से, निराशा, तनाव, डर या दर्द होने पर सांस रोक लेते हैं जिसे देख कोई भी मां परेशान हो जाती है। हालांकि 6 महीने या 5-6 साल की उम्र के बाद बच्चों में इसकी संभावना कम हो जाती है। ऐसे में अगर हम बात करें एक्सपर्ट की तो 60% बच्चों में यह समस्या देखने को मिलती है, जिसे ब्रेथ होल्डिंग सिंड्रोम या Breath Holding Spell कहते हैं। तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि अगर बच्चा ऐसा करें तो मांएं क्या करें और क्या नहीं?

यह समस्या 2 साल के बच्चों में अधिक देखने को मिलती है, जिसका कारण जेनेटिक यानि पारिवारिरीक हिस्ट्री हो सकती है। 

. शरीर में आयरन व हीमोग्लोबिन की कमी
. दिल संबंधी रोग
. ब्रेन ट्यूमर
. नींद के सामान्य पैटर्न में अचानक बदलाव
. सुस्ती या हर वक्त थकावट रहना

ब्रेथ होल्डिंग स्पेल के प्रकार
-इसमें होंठ नीले होना, मांसपेशियों में जकड़ना, शरीर का कड़ा होना, बेहोशी और कभी-कभी झटके भी आ सकते हैं। पहला सीयनोटिक स्पेल, जिसमें बच्चा जिद्द करते समय सांस रोक लेता है। 

-इसमें दिल की धड़कनें कम हो जाती है और पसीना अधिक आता है। पल्लीओड स्पेल, जिसमें किसी चोट या दर्द के कारण रोते समय बच्चे श्वास रोक लेते हैं। वहीं, मिक्स्ड स्पेल, जिसमें सांस रोकने की दोनों ही वजह और लक्षण होते हैं।

ब्रेथ होल्डिंग स्पेल के लक्षण
रोते-रोते त्वचा का रंग लाल, बैंगनी या नीला पड़ जाना
नथुनों का फड़कना
1 मिनट तक बेहोश हो जाना
बच्चा रोते हुए श्वास रोक ले तो उसका रंग सफेद या नीला पर जाता है, खासतौर पर होंठों का
कई बार बच्चा बेहोश हो जाता है और 1 मिनट बाद होश में भी आ जाता है।
1 साल से 3 साल की आयु तक ऐसा होना आम है लेकिन अगर बेहोशी 1 मिनट से ज्यादा तो डॉक्टर से बात करें।

अगर आपका बच्चा भी रोते-रोते रोक लेता हैं सांस, जानिए इसका कारण व उपाय

मांएं क्या करें?
. अगर समान्य स्थिति या सोते समय ऐसा हो तो डॉक्टर को बिना देरी दिखाएं क्योंकि यह दिल की बीमारी या ब्रेन ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है।
. अगर बच्चा रोते-रोते या सांस लेते समय लेट जाए तो उसे उठाने की कोशिश ना करें, इससे मस्तिष्क में ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है।
. नाक-मुंह आदि को गीले कपड़े से साफ करें।
. ध्यान रखें कि अगर बच्चा सांस रोक लें तो उसके मुंह में पानी ना डालें और ना ही उसे ढके।
. बच्चे का मुंह एक ओर करके आराम से गोद में या बिस्तर पर लिटा दें और कपड़े ढीले कर दें। 
. बच्चों के स्वभाव पर ध्यान दें और उसे ज्यादा पैम्पर ना करें। साथ ही उनके आस-पास हमेशा पॉजिटिव माहौल रखें।
. अगर आपको लगे कि बच्चा ज्यादा चिड़चिड़ा या जिद्दी हो रहा है और वो सांस रोक लेगा तो उसके मुंह पर फूंक मारे। इससे वो सांस लेना नहीं भूलेगा।
 

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