बढते Corona के बीच घर पर बच्चों का Online Gaming बन सकता है खतरनाक बीमारीयों का कारण, जानिए कैसे करें देखभाल

 
बढते Corona के बीच घर पर बच्चों का Online Gaming बन सकता है खतरनाक बीमारीयों का कारण, जानिए कैसे करें देखभाल

लाइफस्टाइल डेस्क, जयपुर।। मेरा बेटा स्कूल से आते ही ऑनलाइन गेम में लग जाता है। मना करने के बाद भी नहीं मानता, बहुत परेशान कर दिया है। यह शिकायत रुस्तमपुर की रहने वाली सविता की है। सिर्फ सविता ही नहीं, सिटी के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले तमाम बच्चों के पैरेंट्स बच्चे के ऑनलाइन गेम खेलने की आदत से तंग हो पैरेंट्स टीचर मीटिंग के दौरान काउंसलर से मदद मांग रहे हैं। इन पैरेंटेस को टेंशन है कि बच्चे की ऑनलाइन गेमिंग की लत कहीं उसकी पढ़ाई ना चौपट कर दे।

स्कूल में पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग में काउंसलर्स को तमाम ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जिनमें पैरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चो को मोबाइल फोन पर ऑनलाइन गेम खेलने की लत लग गई है। इन पैरेंट्स का कहना है कि इधर फाइनल एग्जाम्स की डेट भी डिक्लेयर हो चुकी हैं लेकिन उनका बच्चा पढ़ाई करने की जगह ऑनलाइन गेम ही खेलता रहता है। ऐसे में पैरेंट्स को बच्चों के रिजल्ट की चिंता सता रही है। बच्चों के रूटीन में शामिल ऑनलाइन गेमिंग उनके लिए सिरदर्द बन चुका है।

बच्चों के भविष्य के लिए मुसीबत न बन जाए ऑनलाइन गेमिंग की लत

काउंसलर माधवी बताती हैं कि पीटीएम के दौरान कई ऐसे पैरेंट्स ने कंप्लेंट दर्ज कराई है जो बेहद परेशान करने वाली है। ज्यादातर बच्चों के पैरेंट्स का कहना है कि उनके बच्चे स्कूल से जाने के बाद मोबाइल फोन में गेम खेलने लग जाते हैं। स्कूल से आने के बाद जहां उन्हें लंच करके थोड़ा रेस्ट करना चाहिए, वहीं वे गेम में पूरी तरह से खुद को इन्वॉल्व कर लेते हैं। पैरेंट्स के मना करने के बाद भी बच्चे कई बार अनुशासनहीनता पर उतारू हो जाते हैं। वहीं, आरपीएम रुस्तमपुर ब्रांच की प्रिंसिपल व काउंसलर डॉ। सुनीत कोहली बताती हैं कि कई पैरेंट्स ने ऐसी शिकायत की है कि मोबाइल गेम खेलने की आदत के चलते उनके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता। इसके लिए पैरेंट्स को बच्चे को समझाने के टिप्स देने के साथ ही बच्चों की भी काउंसलिंग की जाती है।

पैरेंट्स के लिए सुझाव

- बच्चों को किसी भी तरह ऑनलाइन गेम की लत से बाहर निकालें।

- एग्जाम डेट डिक्लेयर हो जाने के कारण उसे स्कूल से आने के बाद कुछ देर फिजिकली रेस्ट करना जरूरी है।

- शाम 7 बजे से रात के 9.30 बजे तक एग्जाम प्रिपरेशन के लिए पैरेंट्स खुद पढ़ाएं।

- जितने भी क्लास वर्क कंप्लीट हो चुके हैं उन्हें रिवीजन कराएं

- मोबाइल गेम खेलने के बजाय फिजिकल गेम पर जोर दें।

- बच्चे को अकेले पढ़ाई के लिए न छोड़े। साथ में जरूर बैठें।

- शादी-पार्टी हो या फिर कहीं घूमने का मन बनाया हो तो उसे एग्जाम टाइम तक कैंसिल ही करना बेहतर होगा।

- बच्चे को रात 10 बजे तक सोने के लिए कहें।

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