पाकिस्तान के हजारों बम भी हो गए थे इस मंदिर के चमत्कार के आगे बेअसर, बड़ा दिलचस्प है देखने में भी ये मंदिर

 
पाकिस्तान के हजारों बम भी हो गए थे इस मंदिर के चमत्कार के आगे बेअसर, बड़ा दिलचस्प है देखने में भी ये मंदिर

कई श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र पाकिस्तान सीमा के करीब व जैसलमेर से 120 किमी दूर तनोट माता मंदिर है। ताना माता का मंदिर भाटी राजपूत राव तनुजी द्वारा बसाए गए तनोट में ही स्थित है, तनोटराय मातेश्वरी के नाम से भी इस मंदिर को अब जाना जाता है। मंदिर की पूजा अर्चना की जिम्मेदारी सुरक्षा बलों के जवानों की है। लोगों की सबसे ज्यादा भीड़  नवरात्रि के दौरान यहां देखने को मिलती है। ऐसी कई चमत्कारी चीजों से ये मंदिर घिरा हुआ है कि हर कोई सुनने वाला हैरान रह जाता है। चलिए कुछ दिलचस्प बातें आपको इस मंदिर की  बताते हैं -

सबसे पुराने चरण साहित्य के अनुसार तनोट माता दिव्य देवी हिंगलाज माता का अवतार हैं तनोट राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारत-पाक सीमा के पास एक गाँव है। , जिसके बाद उनका करणी माता का रूप देखा जाता है। मंदिर की स्थापना आठवीं शताब्दी की शुरुआत में हुई थी।

पाकिस्तानी सेना ने इसका फायदा उठाते हुए साडेवाला चौकी के पास किशनगढ़ सहित बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया, जहां भारतीय सेना भारी संख्या में मौजूद थी। पाकिस्तान के खिलाफ 1965 के युद्ध में, भारतीय सेना भारी दबाव में थी क्योंकि पकिस्तान की गोलीबारी का जवाब देने के लिए भारतीय जवानों के पास पर्याप्त हथियार नहीं थे।  ये सब देखते हुए भी साडेवाला के 13 ग्रेनेडियर्स अपनी लड़ाई लड़ते रहे। 17 नवंबर को तनोट माता मंदिर के पास चौकी पर गोलाबारी शुरू हो गई, लेकिन आश्चर्य की बात तो ये थी कि इस क्षेत्र में गिरे बम सारे बेअसर हो गए और उनमें से किसी एक में से भी विस्फोट नहीं हुआ।

कहानी ये भी कहती है कि माता जवानों के सपने में आई थीं और उन्हें मंदिर के आसपास रहकर उनकी सुरक्षा करने का वादा किया था। ऐसा कहा जाता है कि 19 नवंबर तक पाकिस्तानी सेना ने 3000 से भी अधिक बम गिराए, लेकिन तनोट माता मंदिर को एक भी खरोंच नहीं आई थी। 

पाकिस्तान के हजारों बम भी हो गए थे इस मंदिर के चमत्कार के आगे बेअसर, बड़ा दिलचस्प है देखने में भी ये मंदिर

उसके बाद से देवी तनोट माता की पूजा की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। मंदिर आज तक बीएसएफ द्वारा संभाला 1965 में भारत द्वारा पाकिस्तान को हराने के बाद, बीएसएफ ने मंदिर परिसर के अंदर एक चौकी की स्थापना की और जाता है। जैसलमेर का किला है दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान में रहने वाला किला, और कितना जानते हैं आप इस किले के बारे में?

पकिस्तान द्वारा भारतीय सेना पर हजारों बम गिराए गए, लेकिन माता की कृपा से सभी बेअसर रहे थे। भारतीय सेना ने मंदिर परिसर के अंदर लोंगेवाला की जीत को चिह्नित करने के लिए एक विजय स्तम्भ का निर्माण किया है। 1971 के युद्ध के बाद, तनोट माता और उनके मंदिर के चमत्कार की गूंज दूर-दूर तक पहुंच गई, जिसके बाद बीएसएफ ने उस जगह पर एक म्यूजियम के साथ एक बड़े मंदिर का निर्माण किया जहां  यहां हर साल 16 दिसंबर को 1971 में पाकिस्तान पर मिली एक बड़ी जीत के रूप में उत्सव मनाया जाता है।

यहां आपको 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद की प्रदर्शनी देखने को मिलेगी। मंदिर में देवी के दर्शन करने के बाद, आप पास के म्यूजियम में भी जा सकते हैं।घूमने के बाद आप थार रेगिस्तान में ऊंट सफारी का भी मजा ले सकते हैं या जैसलमेर के राजसी किलों में जाने की प्लानिंग भी कर सकते हैं।


 

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