आखिर कौन से रहस्य छिपे हैं मॉरिशस के इस द्वीप के आस पास, जिनका वास्ता भारत से भी है?

 
आखिर कौन से रहस्य छिपे हैं मॉरिशस के इस द्वीप के आस पास, जिनका वास्ता भारत से भी है?

ट्रेवल न्यूज डेस्क।। क़तर का एक मीडिया संस्थान है, अल-जज़ीरा. इसने एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पब्लिश की है. हिंद महासागर में बसा एक देश है मॉरिशस। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत मॉरिशस में गुप्त तरीके से एक नौसैनिक अड्डे का निर्माण कर रहा है. ये रिपोर्ट मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जगनॉट के संसद में दिए बयान पर सवाल खड़े करती है. भारत के साथ इसकी जड़ें जुड़ीं है. साझी विरासत, साझी संस्कृति, साझा इतिहास, ये साझापन वर्तमान दौर में भी जारी है, बस इसका मज़मून बदल गया है. प्रधानमंत्री प्रवींद ने कहा था कि भारत और मॉरिशस के बीच मिलिटरी बेस बनाने को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है. अगर रिपोर्ट में किए गए दावे सच हैं तो इसका आगे क्या प्रभाव पड़ेगा?  अल-जज़ीरा की इस रिपोर्ट में और क्या-क्या है? पूरे बखेड़े की कहानी क्या है? और, भारत को मॉरिशस के सुदूर द्वीप पर निर्माण की ज़रूरत क्यों पड़ी? सब विस्तार से बताएंगे.

नॉर्थ अगालेगा आईलैंड.
पीएम मोदी की इस यात्रा का एक खास मकसद था – हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करना. साल 2015 की बात है. मार्च के महीने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन प्रायद्वीपीय देशों के सफ़र पर निकले. ये तीन देश थे – सेशेल्स, मॉरिशस और श्रीलंका.  उसी दिन उनकी मौजूदगी में भारत और मॉरिशस के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग यानी एमओयू पर दस्तखत हुए. इसके तहत दोनों देशों में कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी. क्या-क्या? 12 मार्च को मॉरिशस अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है. पीएम मोदी 2015 में इस समारोह के मुख्य अतिथि थे.  भारत, मॉरिशस के अगालेगा द्वीप के विकास का ज़िम्मा उठाएगा. द्वीप पर रहनेवाले लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाया जाएगा. अगालेगा की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए इंफ़्रास्ट्रक्चर क्रिएट किया जाएगा. भारत ने भरोसा दिलाया था कि इससे मॉरिशस की सेना और शक्तिशाली होगी. और, अपने हितों की ठीक ढंग से सुरक्षा कर पाएगी.

अगालेगा में लगभग तीन सौ लोगों की आबादी है. मछली और नारियल उनकी आय के दो मुख्य स्रोत हैं. जहां तक मेन आईलैंड से कनेक्टिविटी की बात है.  अगालेगा की लंबाई लगभग 12 किलोमीटर, जबकि चौड़ाई तकरीबन डेढ़ किलोमीटर है. यहां हेलिकॉप्टर्स और छोटे एयरक्राफ़्ट्स के लिए कामचलाऊ एयरस्ट्रीप बनी हुई है. इस एयरस्ट्रीप का इस्तेमाल आमतौर पर कोस्ट गार्ड वाले करते हैं. आम परिवहन के लिए समुद्री जहाज की व्यवस्था है. ये मेन आईलैंड से तकरीबन 1100 किलोमीटर दूर है. अगालेगा भी अपनी ख़ूबसूरती के लिए मशहूर है. इसके बावजूद इस द्वीप को पर्यटन के लिहाज से विकसित नहीं किया गया. 

आखिर कौन से रहस्य छिपे हैं मॉरिशस के इस द्वीप के आस पास, जिनका वास्ता भारत से भी है?

 दोनों ही देश सावर्जनिक तौर पर ये कहते आए हैं कि इस द्वीप का इस्तेमाल मिलिटरी ऑपरेशंस के लिए नहीं किया जाएगा. लेकिन जानकारों का मानना है कि बिना किसी सैन्य फायदे के इतना पैसा और संसाधन खर्च करने की बात समझ से बाहर है.  ये सब नॉर्मल चल रहा था, तभी भारत की नज़र इस द्वीप पर पड़ी. भारत ने इसे डेवलप करने का ऑफ़र दिया. बातचीत चली और मार्च 2015 में समझौता हो गया. मॉरिशस ने ऑफ़र पर हामी भर दी.जबकि मॉरिशस के पास अपनी एयरफ़ोर्स भी नहीं है. भारत निर्माण के लिए कम-से-कम 630 करोड़ रूपये खर्च कर रहा है.

मिलिट्री सर्विलांस का काम!
कहा जा रहा है कि इसका इस्तेमाल पी-8आई एयरक्राफ़्ट को उतारने के लिए किया जाएगा. इस एयरक्राफ़्ट का इस्तेमाल एंटी-सबमरीन वॉरफ़ेयर और एंटी-सर्फ़ेस वॉरफ़ेयर में किया जाता रहा है.  अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस समय अगालेगा पर एक हज़ार से अधिक भारतीय मज़दूर काम कर रहे हैं. रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि अगालेगा पर मिलिटरी सर्विलांस का सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है. पिछले दो साल में बड़ी संख्या में ऑफ़िस और बाकी इमारतों का निर्माण हुआ है. उनके रहने के लिए अस्थायी क़्वार्टर्स बने हुए हैं. सेटेलाइट इमेज से पता चला है कि पुरानी एयरस्ट्रीप के ठीक बगल में एक और लंबी एयरस्ट्रीप तैयार की गई है.   विपक्ष सरकार पर अंधेरे में रखने का आरोप लगा रहा है. ऐसा ही विरोध अक्टूबर 2018 में भी हुआ था. इस रिपोर्ट के आने के बाद मॉरिशस में एक बार फिर से सरकार का विरोध शुरू हो गया है. जब मॉरिशस की नेशनल असेंबली में सवाल उठे, तब उप-प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा था,

मॉरिशस का क्या कहना है?
अल-जज़ीरा की ताज़ा रिपोर्ट का जवाब देते हुए मॉरिशस ने कहा कि उसका भारत के साथ अगालेगा में मिलिटरी बेस बनाने का कोई समझौता नहीं हुआ है.  भारत सरकार की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. मॉरिशस सरकार अपने स्टैंड पर कायम है.  जो लोग एक बार अगालेगा से निकलते हैं, उन्हें वापस नहीं आने दिया जा रहा. उन्हें उनकी पुश्तैनी ज़मीन से बेदखल किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अलागेगा को नया ‘डिएगो गार्सिया’ बनाया जा रहा है. हालांकि, स्थानीय लोग अपनी सरकार के दावे पर भरोसा नहीं करना चाहते. उनका कहना है कि उनकी ज़िंदगी में दखल दिया जा रहा है. 

डिएगो गार्सिया की कहानी क्या है?
ब्रिटेन ने पहले तो डिएगो गार्सिया को मिलिटरी बेस में बदल दिया. फिर चुपके से इसे अमेरिका के हवाले कर दिया. डिएगो गार्सिया पर रहनेवाले लोग इलाज कराने या खरीदारी करने बाहर गए तो उन्हें वापस नहीं लौटने दिया गया.  ये शेगोस आईलैंड का हिस्सा है. ये एक समय मॉरिशस में शामिल था. मॉरिशस पर लंबे समय तक ब्रिटिशर्स का राज रहा. बाकी बचे लोगों को 1973 में एक साथ डिएगो गार्सिया से डिपोर्ट कर दिया गया. नाम न जाहिर करने की शर्त पर भारतीय अधिकारियों ने अल-जज़ीरा को बताया कि भारत और मॉरिशस का रिश्ता भाईचारे का है. अलागेगा के मूल निवासियों का आरोप है कि उनके साथ भी वही सुलूक किया जा रहा है.  उसमें ग़ुलाम और मालिक वाला पुट नहीं है.

इसे चीन ने लगभग चार हज़ार करोड़ रुपये की लागत से बनाया था.  साल 2017 में चीन ने जिबूती में विदेशी धरती पर पहला मिलिटरी बेस शुरू किया था. इसके अलावा हमबनटोटा और ग्वादर में भी चीन का मिलिटरी  बेस है. चीन हिंद महासागर में भारत की घेराबंदी कर रहा है. उनके एक द्वीप पर मिलिटरी बेस बनाने को लेकर बात बन गई थी. लेकिन बाद में सेशेल्स सरकार इससे पीछे हट गई.  भारत ने 2015 में मॉरिशस के साथ-साथ सेशेल्स के साथ भी समझौता किया था. जानकारों का मानना है कि चीन के दबाव की वजह से ही सेशेल्स ने भारत के साथ हुए समझौते को नकार दिया था.

अगर अगालेगा पर मिलिटरी बेस बनाए जाने के दावे में सच्चाई है तो ये हिंद महासागर में भारत की स्थिति को मज़बूत ही करेगा. हालांकि, ये एक कयास भर ही है. ऐसे में हिंद महासागर में भारत की बड़ी उम्मीद मॉरिशस पर टिकी है. फिलहाल, भारत हिंद महासागर में फ़्रांस और दक्षिण अफ़्रीका के मिलिटरी बेस का इस्तेमाल करता है.  जब तक ये प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो जाता या सरकारों की तरफ से दावे की पुष्टि नहीं होती, तब तक अगालेगा का रहस्य, रहस्य ही बना रहेगा. अगालेगा में मिलिटरी बेस को लेकर 2018 से मीडिया रिपोर्ट्स पब्लिश हो रहीं है. लेकिन दोनों सरकारें इसपर कुछ भी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं. 

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