भारतीय नागरिक होने के बावजूद भी इन राज्यों में घूमने के लिए लेना होता है ‘वीजा’

 
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हम सभी लगभग हर मौसम में कहीं न कहीं घूमने का सोचते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं की हमारे देश के ही कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां भारतीय नागरिक होने पर भी आपको उस राज्य में प्रवेश करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी होती है। जी हाँ !!! आपने बिलकुल सही सुना, इस तरह की अनुमति को ‘Inner Line Permit (ILP)’ कहा जाता है। इसे आप ऐसे समझिये, जैसे आप किसी ऐसे देश में ट्रेवल कर रहे हैं जहां वीजा ऑन अराइवल होता है।  तो इन राज्यों में जाना आपके लिए बिल कुल ऐसा ही होगा।  

इसका कारण हैं इन राज्यों का अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ होना, जो इन इलाकों को काफी संवेदनशील बना देता हैं।  इसी कारण इन इलाकों में जाने से पहले आपको अनुमति की आवशकता होती है, फिर चाहे आप घूमने जाये या किसी और काम से।  

इनर लाइन परमिट के इस नियम को भारतीय नागरिकों के लिए ब्रिटिश सरकार ने बनाया था। हालाँकि, आजादी के बाद भी इसके नियमों में कुछ फेरबदल कर इसे जारी रखा गया। ‘इनर लाइन परमिट’ एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जिसे भारत सरकार द्वारा एक निश्चित समय के लिए यात्रा की अनुमति के तौर पर जारी किया जाता है।  

इनर लाइन परमिट के इस नियम देश के उत्तरपूर्व में बसे मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश एवं नागालैंड में लागू होते है। साथ ही वो राज्य वो अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर से लगे हैं जैसे की लेह-लद्दाख आदि पर भी ये लागु है। इनर लाइन परमिट बनाने का नियम जिन राज्यों में है वहां आप इसे वहां के बॉर्डर पर बनवा सकते हैं। इसके साथ ही ये परमिट आप चाहें तो  दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी में इनके ऑफिस भी है वहां भी आप इन्हे बनवा सकते है। इसमें 120 से 300 रुपए का खर्च आता है और इसके लिए आपको पासपोर्ट साइज फोटो और सरकारी पहचानपत्र की जरूरत होगी।  

मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश एवं नागालैंड के लिए आप एकबार में अधिकतम 15 दिन के लिए आईएलपी परमिट बनवा सकते है। अगर आप वहां और रुकना चाहते हैं तो इसे रिन्यूवल करा सकते हैं। अगर आप किसी ट्रैवेल एजेंसी से यहां के लिए पैकेज लेते हैं तो वो आईएलपी करा कर देते हैं।

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