क्या आप जानते है भारत के सबसे पुराना किला, जिसके रहस्य को जिसने भी चाहा जानना वो हाथ धो बैठा जिंदगी से

 
क्या आप जानते है भारत के सबसे पुराना किला, जिसके रहस्य को जिसने भी चाहा जानना वो हाथ धो बैठा जिंदगी से

ट्रेवल न्यूज डेस्क।। सारी दुनिया में अपनी भव्यता के लिए जाने जाने वाले भारत में एक से बढ़कर एक किले है. इसी के चलते एक ऐसे ही किले के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसे सभी किलो में भारत में मौजूद सबसे पुराना किला माना जाता है. यह किला किसी रहस्य से कम नहीं है, क्योंकि यह कब बना है आज तक कोई भी नहीं जान पाया है. हम बात कर रहे हैं कांगड़ा किले के बारे में, जो हिमाचल प्रदेश में है 463 एकड़ में फैला यह किला हिमाचल में मौजूद किलो में सबसे विशाल है. त्रिगत साम्राज्य का उल्लेख महाभारत में मिलता है. माना जाता है कि इसका निर्माण कांगड़ा राज्य (कटोच वंश) के राजपूत परिवार ने करवाया था, जिन्होंने खुद को प्राचीन त्रिगत साम्राज्य के वंशज होने का प्रमाण दिया था. 

क्या आप जानते है भारत के सबसे पुराना किला, जिसके रहस्य को जिसने भी चाहा जानना वो हाथ धो बैठा जिंदगी से

कभी इस किले में हुआ करता था अपार धन
कहा जाता है कि समय था जब कांगड़ा किला अपार धन के लिए मशहूर था. कांगड़ा फोर्ट को लेकर कई कहानियां हैं जो कि लूट, विश्वासघात और विनाश से जुड़ी हैं. यही वजह थी कि इस पर महमूद गजनी, मोहम्‍मद बिन तुगलक, फिरोज शाह तुगलक, अकबर ने हमले किए.

1846 तक यह सिखों की देखरेख में रहा और उसके बाद यह अंग्रेजों के अधीन हो गया. मुगलों से अपने प्राचीन किले को 1789 में आखिरकार कटोच वंश के राजा संसार चंद द्वितीय ने जीता लेकिन 1809 में महाराजा रणजीत सिंह ने किले पर कब्‍जा कर लिया. 

एक भीषण भूकंप के बाद चार अप्रैल 1905 को आए अंग्रजों ने इस किले को छोड़ दिया, लेकिन इससे किले को भारी क्षति हुई. यह किला अपने आप में इतिहास की कई कहानियां समेटे हुए है। इसके कारण कई बहुमूल्य कलाकृतियां, इमारतें नष्ट हो गईं.

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