मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है सकारात्मक सोच, जाने कैसे रहे पॉजिटिव

 
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लाइफस्टाइल डेस्क, जयपुर।। सकारात्‍मक सोच स्‍वस्‍थ और खुशहाल जीवन का मूलमंत्र है। ढेर सारी सूचनाओं और प्रतिस्पर्धी दुनिया में, हम अक्सर उन विचारों में गुम हो जाते हैं, जो हमारे दिमाग को अपने कब्‍जे में ले लेते हैं। जरूरी नहीं कि ये सभी विचार सकात्‍मक हों। अकसर हम तनावपूर्ण चीजों के बारे में ज्‍यादा सोचने लगते हैं। जिससे हमारी शारीरिक ही नहीं मानसिक सेहत भी प्रभावित होती है। लांकि, नकारात्मक विचारों के इस चक्र को तोड़ना और सकारात्मक सोच पैदा करना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के एक अध्ययन के अनुसार, हृदय रोग के पारिवारिक इतिहास वाले जिन लोगों के जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण था, उनमें नकारात्‍मक दृष्टिकोण वाले लोगों की तुलना में हार्ट अटैक होने का जोखिम एक तिहाई कम था।

क्या है सकारात्मक सोच ?
सकारात्मक सोच का अर्थ है सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करना। एक व्यक्ति जो सकारात्मक तरीके से सोचता है, वह अपने आसपास के लोगों और घटनाओं के उज्‍ज्‍वल पक्ष पर ही ध्‍यान केंद्रित करता है।

तनाव प्रबंधन: आपकी सोच जितनी अधिक सकारात्मक होगी आप पर तनाव का दबाव उतना ही कम होगा। वैज्ञानिकों ने पाया है कि सकारात्मक सोच वाले व्‍यक्ति हर घटना के उज्‍ज्‍वल पक्ष को देख सकने में समर्थ होते हैं। जिससे उन्‍हें अगर तनाव होता भी है तो वे उसका असर समग्र स्‍वास्‍थ्‍य पर नहीं पड़ने देते। और बेहतर तरीके से मैनेज कर पाते हैं।

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इस तरह करें सकारात्‍मक सोच को अपने जीवन में शामिल
मुस्कान: मुस्‍कुराना किसी चमत्‍कार से कम नहीं है ! इससे फर्क नहीं पड़ता कि काम कितना तनावपूर्ण है, मुस्कुराहट के साथ काम करते हुए आप अपने आसपास सकारात्‍मक दृष्टिकोण में इजाफा करते हैं। यह आपको आशावादी भी बनाता है।

अपनी ताकत को हाइलाइट करें: सकारात्मक बने रहने के लिए, आपको अपनी ताकत को याद करते रहना जरूरी है। अपने सामर्थ्‍य की स्‍वयं सराहना करनी आनी चाहिए। अगर नकारात्‍मक सोच को दूर रखना है तो अपने कौशल का इस्‍तेमाल अपनी दैनिक गतिविधियों में करें।

सकारात्मक सोच आपको अपने जीवन के बारे में बेहतर निर्णय लेने और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकती है।  इससे आप यह महसूस करेंगी कि आपका शरीर और दिमाग काम के साथ-साथ अपने व्‍यक्तिगत संबंधों के प्रति भी ज्‍यादा सजग हो गया है।

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